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हमारे लोगों को चिंता है कि इस समय संसार सचमुच संकट में है। यदि हमने भूलें सुधारकर अपना मार्ग नहीं बदला और महान आत्मा के लिए जीवन को सुंदर, स्वच्छ तथा चिरस्थायी नहीं बनाया, तो हम घोर विनाश की ओर बढ़ेंगे। क्योंकि देर-सवेर शुद्धिकरण होगा और उससे बचने का कोई मार्ग नहीं है।
मैंने बताया था कि बहुत पहले हमारे आध्यात्मिक गुरुओं को ज्ञात था कि किसी दिन विदेशी लोग हमारी भूमि पर आएँगे और वह बनाएँगे, जिसे वे“रूपीकी” यानी “काँच का घर” कहते हैं, ताकि शांति, न्याय और सद्भाव स्थापित हो।हमारे लोगों को चिंता है कि इस समय संसार सचमुच संकट में है। यदि हमने भूलें सुधारकर अपना मार्ग नहीं बदला और महान आत्मा के लिए जीवन को सुंदर, स्वच्छ तथा चिरस्थायी नहीं बनाया, तो हम घोर विनाश की ओर बढ़ेंगे। क्योंकि देर-सवेर शुद्धिकरण होगा और उससे बचने का कोई मार्ग नहीं है। यहाँ हर कुर्सी पर संयुक्त राष्ट्र का प्रतिनिधि होना चाहिए। उन्हें सबसे पहले उन मूलनिवासियों की बात सुननी चाहिए, जिनकी यह भूमि है। उन्हें यहाँ होना चाहिए। धन्यवाद!मैं श्री थॉमस बन्याक्या को धन्यवाद देता हूँ। मुझे विश्वास है कि आपके शब्दों और ज्ञान पर समुचित ध्यान दिया गया है।11 दिसंबर, 1992 को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष होपी आदिवासी समुदाय के सम्मानित बुज़ुर्ग दादा थॉमस बन्याक्या ने अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों के सामने एक प्रभावशाली भाषण दिया। यह होपी आदिवासी समुदाय के लोगों का चार दशकों से भी अधिक समय से संजोया गया सपना था।1945 में, जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने पर होपी प्रथम राष्ट्र के बुज़ुर्गों ने समझा कि आकाश से “राख से भरी लौकी” गिरने की उनकी भविष्यवाणी सच हो गई है और संसार तेज़ी से खतरनाक में दिशा बढ़ रहा है। उन्होंने अपने पारंपरिक उपदेशों और भविष्यवाणियों को बाहरी संसार तक पहुँचाना आवश्यक समझा। 1948 में उन्होंने अपने लोगों में से चार व्यक्तियों को प्रवक्ता चुना, जिनमें वुल्फ़, फ़ॉक्स और कोयोटी कुल के सदस्य थॉमस बन्याक्या भी थे।इन चार दशकों के दौरान दादा थॉमस बन्याक्या ने संयुक्त राष्ट्र में बोलने का चार बार अनुरोध या, किलेकिन तीन बार उन्हें अवसर नहीं मिला। उन्होंने हार नहीं मानी; उनका चौथा अनुरोध स्वीकार कर लिया गया।दादा थॉमस बन्याक्या के 1992 के संयुक्त राष्ट्र भाषण का आरंभ टर्टल कुल के धर्मरक्षक माननीय ओरेन लायन्स की तीन पुकारों से हुआ। इन पुकारों ने महान आत्मा और वहाँ उपस्थित सभी लोगों को सूचित किया कि आध्यात्मिक महत्व का संदेश दिया जाने वाला है। इसके बाद दादा थॉमस बन्याक्या ने धन्यवाद प्रकट करने और इस अवसर के लिए आशीर्वाद आमंत्रित करने हेतु मंच के पास मक्के का आटा छिड़का, क्योंकि होपी आदिवासी समुदाय के लोगों के लिए मक्का पवित्र है।फिर एक बुज़ुर्ग के आत्मविश्वास, गरिमा और शांति के साथ दादा थॉमस बन्याक्या ने पृथ्वी की पिछली तीन सभ्यताओं से जुड़ा प्राचीन होपी ज्ञान साझा किया।हमारे लोगों को चिंता है कि किसी दिन इस भूमि पर अनेक समस्याएँ आएँगी। वे प्रथम विश्व को जानते हैं, जहाँ मानव जीवन की शुरुआत सुंदर और स्वच्छ थी, लेकिन मनुष्यों ने अनेक वस्तुएँ बनाकर उनका दुरुपयोग पशुओं, पक्षियों और वनस्पतियों पर किया। उन्होंने इसे नहीं रोका। प्रकृति ने उस संसार को पूर्णतः नष्ट कर दिया। अत: धरती पर भीषण भूकंप आया और अनेक भूभाग अलग होकर डूब गए।मुट्ठी भर लोग बचकर द्वितीय विश्व में पहुँचे। द्वितीय विश्व में वे बहुत आगे बढ़े। वह संसार फिर सुंदर और स्वच्छ था। मनुष्यों ने फिर अनेक आविष्कार किए और अपने आध्यात्मिक मार्ग से विमुख हो गए। और अधिक सिद्धांत खो गए। वे एक-दूसरे को सुधारने के बजाय अनेक वस्तुओं का आविष्कार करते रहे। इसलिए उन्होंने यह सब नहीं रोका। तब प्रकृति ने फिर नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इस बार सब कुछ जम गया। उस समय संभवतः हिमयुग आया था।लेकिन मुट्ठी भर लोग तृतीय विश्व में पहुँचे। 1948 की उस बैठक में उन्होंने कहा कि तृतीय विश्व में लोग बहुत आगे बढ़े, अनेक आविष्कार और हर प्रकार के अत्यंत उन्नत हथियार बनाए तथा आध्यात्मिक शक्तियाँ भी विकसित कीं, पर उनका सदुपयोग करने के बजाय उन्हें फिर प्रकृति के विरुद्ध इस्तेमाल किया, और इस बार वह संसार बाढ़ से नष्ट हुआ।फिर दादा थॉमस बन्याक्या ने हमारे वर्तमान युग के लिए गंभीर चेतावनी दी।मैं यह लौकी की खड़खड़ाहट लाया हूँ, जिसका हम आज भी उपयोग करते हैं। यह संसार का प्रतीक है। प्रार्थना, ध्यान और उपवास करते समय आप इसे ठीक तरह थामते हैं और प्रार्थनाओं, ध्यान तथा अनुष्ठानों से संसार का संतुलन बनाए रखते हैं। सभी मूलनिवासी यह जानते हैं। इसी प्रकार हम धरती माता की देखभाल करते हैं। इसका एक निर्धारित समय है और हम अंतिम चरणों के निकट पहुँच रहे हैं। यदि इस भूमि पर कोई इन गलत कार्यों को सुधारकर अपना मार्ग नहीं बदलता, तो शुद्धिकरण होगा। चारों दिशाओं की शक्तियाँ आएँगी और अपनी विकसित शक्ति का दुरुपयोग कर उससे पशुओं, पक्षियों तथा मनुष्यों को नष्ट करने वालों को कठोर दंड देंगी। ये कुछ ऐसी भयावह बातें हैं, जिन्हें होपी लोग जानते हैं, और मैं आपको बताना चाहता हूँ, क्योंकि आज प्रकृति भी सक्रिय है।अभी अलग-अलग स्थानों पर भीषण भूकंप, भूस्खलन, बवंडर, चक्रवात, ज्वालामुखी विस्फोट और ज्वारीय लहरें आ रही हैं; ओलावृष्टि अधिक प्रचंड होती जा रही है और यदि हमने रसायनों से छेड़छाड़ तथा हानिकारक रसायनों को छोड़ना बंद नहीं किया, तो वह शीघ्र ही अनेक राष्ट्रों और इमारतों को नष्ट कर सकती है; ये रसायन हवा में ऊपर जाएँगे। वहाँ गैस के धुएँ जैसा आवरण बन जाएगा। कहा जाता है कि किसी दिन उसमें आग लग सकती है। उपर आकाश में आग भड़क उठेगी। हम उस समय के निकट पहुँच रहे हैं।इसके बाद दादा थॉमस बन्याक्या ने दर्शकों को एरिज़ोना के होटेवीला के पास एक चट्टान पर उकेरे गए प्राचीन शैलचित्र की तस्वीर दिखाई। उस चित्र में दो मार्ग दर्शाए गए हैं, जिनमें से मानवता को चतुर्थ विश्व के अंत में एक चुनना होगा।दो मार्ग हैं। और हम ठीक यहाँ हैं। हम या तो आविष्कारों के मार्ग पर आगे बढ़कर युद्ध के सबसे शक्तिशाली साधनों के कारण स्वयं अपने शिकार बनें, या इस भूमि और जीवन को प्रार्थनाओं से सँभाल रहे अपने मूलनिवासियों के इस शुद्ध क्षेत्र में लौटें, उनसे जुड़ें और अपनी गलतियाँ सुधारें। तब हमें यह भूमि और जीवन देने वाली महान आत्मा लौटेगी और जीवित बचने वालों का स्वागत करेगी।भविष्यवाणी बताती है कि जीवित रहने का मार्ग केवल प्रौद्योगिकी को उन्नत करने वाला ऊपर जाता मार्ग नहीं, बल्कि प्रार्थना, प्रकृति की रक्षा और गलत कार्यों का त्याग करके आदिवासी समुदाय के लोगों के मार्ग पर लौटना है।दादा थॉमस बन्याक्या ने मानचित्र पर विशेष रूप से उस क्षेत्र की ओर संकेत किया, जिसकी रक्षा आवश्यक है।इसलिए फ़ोर कॉर्नर्स क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह चार पवित्र पर्वतों से घिरा है। यह हमारा आध्यात्मिक द्र है, केंजिसकी रक्षा सभी लोगों को करनी चाहिए।फ़ोर कॉर्नर्स वह क्षेत्र है, जिसमें कोलोराडो, यूटा, एरिज़ोना और न्यू मेक्सिको के कुछ भाग आते हैं। होपी परंपरा के अनुसार, फ़ोर कॉर्नर्स चार पवित्र पर्वतों से घिरा तुवानासावी नामक पावन आध्यात्मिक केंद्र है। उनके पूर्वजों ने अपनी महान यात्राओं के दौरान इन भूमियों को पार किया और अनुष्ठानों तथा प्रार्थनाओं से पृथ्वी का संतुलन बनाए रखा। इसलिए इस क्षेत्र की रक्षा अत्यंत आवश्यक है।हमारे सुप्रीम मास्टर चिंग हाई इंटरनेशनल एसोसिएशन की एक सदस्या (सभी वीगन हैं) ने अपने आंतरिक दर्शन में फ़ोर कॉर्नर्स क्षेत्र के राष्ट्रीय उद्यानों के आसपास विशेष ऊर्जा देखी।ज़ायन राष्ट्रीय उद्यान पवित्र आत्मा द्वारा संरक्षित स्थान है और यह भूमि स्वयं आशा करती है कि मानवता इस पवित्र स्थल की रक्षा में सहायता करेगी। घाटी की तस्वीरें देखते हुए मेरे आध्यात्मिक दर्शन में समय और स्थान से परे दृश्य उभरते हैं— बहुत पहले ज़ायन राष्ट्रीय उद्यान का विशाल भूभाग समुद्र के नीचे था और मत्स्य-जन के झुंड स्वतंत्रतापूर्वक तैरते थे... जब मेरी दिव्य दृष्टि ने आकाश से व्यापक दृश्य देखा, तो मैंने भूमिगत फैली एक विशाल ऊर्जा-संरचना देखी, जो इन चारों राज्यों के विस्तृत क्षेत्र में फैली थी। यह भूमि धरती माता के अपार, भव्य प्रेम से ओतप्रोत है। यहाँ का वातावरण अत्यंत प्राचीन है! मानो गुज़रती हुई हवा भी बीते युगों की साँसें साथ लिए चलती हो।अपने आंतरिक दर्शन में मैंने भूमिगत महलों के एक विशाल समूह की अदृश्य, पवित्र ऊर्जा भी देखी, जो हल्की सुनहरी आभा से झिलमिला रहे थे। वे फ़ोर कॉर्नर्स के उस केंद्र में फैले हैं, जहाँ यूटा, एरिज़ोना और दो अन्य राज्य मिलते हैं। मैं सोचती हूँ, पारदर्शी प्रकाश के रूप में विद्यमान ये प्राचीन, अमूर्त पवित्र महल न जाने कब से पहरा दे रहे हैं। वे धरातल के निकट स्थित हैं; मंदिरों के कुछ शिखर घाटी की तलहटी से बाहर निकले हैं, जबकि अधिकांश भूमिगत छिपे हुए हैं। कुछ क्षेत्रों में ऊर्जा क्षीण हो रही है, फिर भी वे सक्रिय हैं। कभी-कभी मंदिरों की रहस्यमय ऊर्जा बाहर निकलती है और विशेष आध्यात्मिक जुड़ाव वाले लोग उसे कैमरे में कैद कर सकते हैं (जैसे एसोसिएशन की एक अन्य सदस्या (वीगन) द्वारा खींची गई प्रकाश-ऊर्जा की धारियाँ)। इस चमत्कारी ऊर्जा को देख पाना दर्शाता है कि व्यक्ति का आंतरिक प्रकाश उसके साथ स्पंदित हो रहा है। यह ऊर्जा संतस्वरूप लोगों के सामने प्रकट होती है। लेकिन अधिकांश लोग केवल प्रकृति की भव्यता ही अनुभव कर पाते हैं। वे न तो इन असाधारण घटनाओं को कैमरे में कैद कर सकते हैं, न ही इनके रहस्यों को समझ सकते हैं।मैंने आसपास के विशाल क्षेत्र को घेरे आदिवासी समुदाय के पूर्वजों की अनेक आत्माएँ भी देखीं। एक विशाल, एकीकृत सामूहिक चेतना में मिलकर उन्होंने आदिवासी समुदाय के लोगों की विराट, पारदर्शी आकृतियाँ बनाईं, जो पर्वत-शिखरों पर खड़ी गंभीरता से घाटी को निहार रही थीं और इस भूमि की रखवाली कर रही थीं। कुछ आदिवासी समुदाय के लोग आँखों में आँसू लिए इस बात से दुखी हैं कि मानवता धरती माता के साथ कैसा व्यवहार करती है। वे विलाप कर रहे हैं, “अब हम इसकी रक्षा नहीं कर सकते। शायद यह स्थान फिर समुद्र में समा जाएगा और समुद्र तल से ऊपर की सभी पर्वतीय चट्टानें और घाटियाँ दोबारा डूब जाएँगी। बाढ़ बहुत विशाल, असाधारण रूप से विशाल होगी!” यहाँ की धरती पुकारती है: “काश, मानवता शीघ्र जाग जाए! यदि मनुष्य भोजन के लिए पशु-जनों की हत्या करने की आदत नहीं छोड़ते, तो पर्वतों और समुद्रों को उलट देने वाली भीषण उथल-पुथल निकट है! प्रकृति बहुत चिंतित है, क्योंकि मानवता के नरक में गिरने का समय निकट आ रहा है। एक बार हम फिर समुद्र की गहराइयों में डूब गए, तो बहुत देर हो जाएगी!”हमारी परम प्रज्ञावान सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) ने लोगों से आदिवासी समुदाय के लोगों की बातों का सम्मान करने और पवित्र स्थलों की रक्षा करने का आग्रह किया है।इसलिए यदि आप कहीं जाएँ और मूलनिवासी कहें, “कृपया उस क्षेत्र या इस स्थान को न छेड़ें,” तो संभव है कि वे उस स्थान की पवित्रता जानते हों। इसलिए कृपया सम्मानपूर्वक उनकी बात सुनें।पहले मनुष्य केवल अपनी शारीरिक शक्ति—बंदूकों, चाकुओं और ऐसी ही वस्तुओं—पर निर्भर थे, इसलिए कभी-कभी हमने मूलनिवासियों की भूमि छीन ली और देवगण के निवास-स्थलों तथा पूजा-मंदिरों पर कब्ज़ा करके उन्हें अप्रसन्न किया; फिर केवल अपनी अज्ञानता के कारण हमने दुर्भाग्य और त्रासदी को आमंत्रित किया। हम वह नहीं देख सकते, जो मूलनिवासी दिव्यदर्शी देखते हैं। हर मूलनिवासी राष्ट्र या समुदाय में कोई न कोई ऐसा होता है, जिसे प्रकृति का ज्ञान होता है, जो भौतिक अवरोधों के पार देखकर वे चीज़ें देख सकता है, जिन्हें सामान्य लोग नहीं देख सकते। […]इसलिए कृपया, मैं आपको याद दिलाती हूँ—[…] पृथ्वी पर आप जहाँ भी कदम रखें, हर कदम में कृतज्ञ और सम्मानपूर्ण रहें। तब आपके जीवन में समस्याएँ और आपदाएँ कम होंगी।हम दादा थॉमस बन्याक्या और आदिवासी समुदाय के सभी बुज़ुर्गों के अत्यंत आभारी हैं, जिन्होंने मानवता के अस्तित्व के लिए आवश्यक संदेश जन-जन तक पहुँचाने हेतु दशकों तक अथक परिश्रम किया। सभी उनकी चेतावनियों पर ध्यान दें और शांति तथा सद्भाव की ओर ले जाने वाला मार्ग चुनें।










