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आज 19 जून 2026 की भोर है। सुबह लगभग चार बजे मुझे जगाने के लिए स्वर्गीय संगीत सुनाई दिया। अभी मैं पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुई हूँ, लेकिन मुझे खुशी है कि शांति बुद्ध राजा आए और उन्होंने मुझे जगाया। महामहिम शांतिराज बुद्ध, आप मुझसे अपने लिए क्या करवाना चाहते हैं? महामहिम शांतिराज बुद्ध टो, टी-ओ, महामहिम बुद्धराजा टो, आप चाहते हैं कि मैं सुदूर लोक के किसी बुद्धराजा से बात करूँ। मुझे खुशी होगी। मुझे खुशी होगी, क्योंकि कल क्या हो, कोई नहीं जानता। शांति के संघर्ष में विजय के बाद भी मैं बहुत कमज़ोर हूँ, पर बात करने योग्य हूँ। तो कृपया सुदूर लोक के महामहिम बुद्धराजा को आमंत्रित कीजिए। धन्यवाद। मुझे उनका नाम बताइए। फू। एफ-यू। हाँ, मैंने देखा है कि यहाँ से दूर विभिन्न लोकों के सभी नाम बहुत संक्षिप्त होते हैं। आपको समझना होगा कि हम उन्हें राजा इसलिए कहते हैं, क्योंकि वे अपने रचे हुए संसार के भी राजा हैं, लेकिन उन्हें बुद्ध भी कहा जा सकता है, जैसे शाक्यमुनि बुद्ध ने औषधि बुद्ध का परिचय दिया था। उन्होंने कहा था, “यहाँ से बहुत दूर, इस ग्रह से दस गंगा नदियों के रेत-कणों जितनी दूरी पर औषधि बुद्ध नामक एक बुद्ध हैं।” आप समझे, लेकिन उन्होंने उन्हें राजा भी कहा था—याओशी लिउली गुआंग वांग फो—अर्थात वे औषधि स्फटिक प्रकाश राजा भी हैं और बुद्ध भी। शाक्यमुनि बुद्ध के समय लोग उन्हें महाराज भी कहते थे, जिसका अर्थ है “राजा।” और प्रभु यीशु मसीह के जीवनकाल में लोग उन्हें यहूदियों का राजा भी कहते थे। तो अब यह बात स्पष्ट है। जिन राजाओं का मैंने उल्लेख किया है, वे अपने राज्यों और लोकों के शासक हैं, इसलिए उन्हें राजा कहा जाता है, लेकिन हम उन सभी को बुद्ध भी कह सकते हैं। शायद हर राजा की उपाधि के साथ कोष्ठक में “बुद्ध” लिखना चाहिए, ताकि लोगों को स्पष्ट हो कि वे इस संसार के राजाओं जैसे नहीं हैं। उन्होंने अपने राज्य स्वयं रचे हैं। जब वे किसी भौतिक लोक या किसी अन्य भौतिक ग्रह पर थे, तब उनके शिष्य थे। यह केवल हमारे ग्रह तक सीमित नहीं है। इतने अधिक, इतने अधिक, इतने असंख्य ग्रह हैं कि उनकी सूची बनाना संभव नहीं। इसलिए राजा या बुद्ध द्वारा लोगों को दीक्षा देने के बाद, वे अपनी प्रबल शक्ति से अपना संसार रचते हैं, ताकि उनके अनुयायी और शिष्य वहाँ जाकर अपने गुरु के साथ रह सकें, जिन्हें वे स्वाभाविक रूप से राजा भी कहते हैं, क्योंकि वे अपनी रचना पर शासन करते हैं। वे सुंदर, शांतिमय, आनंदपूर्ण और सुखमय ग्रह तथा लोक रचते हैं, जहाँ लोगों को कभी किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं होती। यह अमिताभ बुद्ध की भूमि के समान है। जैसा कि आप जानते हैं, वहाँ सुंदर झीलें, सुंदर सरोवर, सुंदर वृक्ष, सुंदर दृश्य, और भव्य भवन हैं- जिनमें हर कोई रह सकता है। उनके संसार में भी अनेक क्षेत्र हैं, जहाँ लोग अपने पुण्य और ज्ञानोदय के स्तर के अनुसार रहते हैं। “तब बुद्ध ने ज्येष्ठ सारिपुत्र से कहा: ‘यदि आप यहां से पश्चिम की ओर यात्रा करोगे, एक लाख कोटि बुद्ध भूमि पार करोगे, तो आप परमानंद नामक भूमि पर पहुंचोगे, जहां अमिताभ नामक एक बुद्ध हैं। वह अब वहीं रहकर धर्म की शिक्षा दे रहे हैं। ‘सारिपुत्र, उस भूमि को परम आनंद क्यों कहा जाता है? उस भूमि में रहने वाले प्राणियों को कोई कष्ट नहीं होता, बल्कि वे विभिन्न प्रकार के सुखों का आनंद लेते हैं। इसी कारण उस भूमि को परम आनन्द कहा गया है। पुनः, सारिपुत्र, परम आनन्द की भूमि में सात पंक्तियों की रेलिंग, सात पंक्तियों की सजावटी जालियाँ, तथा सात पंक्तियों के वृक्ष हैं। वे सभी चार प्रकार के रत्नों से बने हैं और सम्पूर्ण पृथ्वी पर फैले हुए हैं तथा सब कुछ को अपने में समाहित किये हुए हैं। इसी कारण उस भूमि को परम आनन्द कहा गया है। हे सारिपुत्र! परम आनन्द की भूमि में सात रत्नमय तालाब हैं, जिनमें आठ उत्तम गुणों वाला जल भरा हुआ है। तालाबों के तल पूरी तरह से सोने की रेत से ढके हुए हैं, और प्रत्येक तल के चारों ओर सोने, चांदी, बेरिल और क्रिस्टल की सीढ़ियां उभरी हुई हैं। इनके ऊपर सोने, चांदी, बेरिल, क्रिस्टल, नीलम, गुलाबी मोती और कॉर्नेलियन से सुसज्जित मंडप हैं। तालाबों में रथ के पहिये जितने बड़े कमल हैं - नीले कमल नीले प्रकाश को, पीले कमल पीले प्रकाश को, लाल कमल लाल प्रकाश को, तथा सफेद कमल सफेद प्रकाश को उत्सर्जित कर रहे हैं। वे अद्भुत और सुन्दर, सुगंधित और शुद्ध हैं। परम आनन्द की भूमि, सारिपुत्र, ऐसे भव्य अलंकरणों से भरी हुई है। ‘फिर, सारिपुत्र, उस बुद्ध भूमि में दिव्य संगीत निरंतर बजता रहता है। ज़मीन सोने से बनी है। दिन और रात में छह बार आसमान से मंदारवा फूल बरसते हैं। […] ‘सारिपुत्र, यदि कोई सज्जन पुरुष या स्त्री अमिताभ का नाम सुनकर एकाग्रचित्त होकर एक दिन, दो दिन, तीन, चार, पांच, छह या सात दिन तक भी उनके नाम का स्मरण करता है,तो मृत्यु के समय अमिताभ अनेक पवित्र पुरुषों के साथ प्रकट होते हैं। फलस्वरूप, जब उनका जीवन समाप्त हो जाएगा, तो साधकों का मन भ्रमित नहीं होगा और वे तुरंत ही परम आनंद की भूमि अमिताभ में जन्म लेंगे। हे श्रीपुत्र, इन लाभों को देखकर मैं कहता हूँ: इस उपदेश को सुनने वाले सभी प्राणियों को उस भूमि में जन्म लेने की इच्छा रखनी चाहिए।’” शाक्यमुनि बुद्ध (वीगन) द्वारा दिए गए अमिताभ बुद्ध पर सूत्र से अमिताभ बुद्ध की भूमि में उनके शिष्यों, अनुयायियों या श्रद्धालुओं जैसे विभिन्न ज्ञानप्राप्त और पुण्यवान प्राणियों के लिए नौ स्तर हैं। वैसे, महामहिम शांतिराज बुद्ध का नाम टो, टी-ओ है। उन्होंने जिन अन्य बुद्धराजाओं को मुझसे मिलने के लिए आमंत्रित किया या भेंट की व्यवस्था की, उनके विपरीत महामहिम बुद्धराजा टो अब भी हमारे ग्रह पर, ताइवान (फॉर्मोसा) में रहते हैं। मैं आपको पहले ही बता चुकी हूँ कि कई अन्य बुद्धराजा भी हैं और संभवतः वे आकर अपना परिचय देंगे, जैसे यौवन के बुद्धराजा, जिनसे बात करने का अवसर मुझसे चूक गया था। वे ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं, क्योंकि अभी वे मेरे परमेश्वर के शिष्य हैं। लेकिन निस्संदेह उनकी आत्मा एक उच्चतर आध्यात्मिक आयाम में रहती है। लेकिन बाद में वे अपने राज्य में होंगे; यौवन के बुद्धराजा पहले प्रस्थान करेंगे। वे दोनों अभी चौथे स्तर पर हैं। लेकिन इतने सारे बुद्धराजाओं को मुझसे मिलवाने की व्यवस्था में सहायता करने के बाद निस्संदेह उनका स्तर बढ़ जाएगा। अवसर मिला तो हम इस विषय पर बाद में बात करेंगे। आज के बुद्धराजा का नाम साई, एस-वाई है। वे हमसे अरबों प्रकाश-वर्ष दूर से आए हैं—पृथ्वी से सात अरब से अधिक प्रकाश-वर्ष दूर बुद्धराजा साई अपने स्वयं के रचे बुद्ध-लोक में निवास करते हैं। वे मुझे हमारी शांति के लिए बधाई देने और एक निजी उपहार भेंट करने आए हैं। देखते हैं कि वे क्या उपहार लाए हैं। बुद्धराजा साईजिस लोक पर शासन करते हैं, उसका नाम पी-आर-ओ है। इसका अर्थ है “यौवन।” बुद्धराजा मेरे लिए यौवन का उपहार लाए हैं, जिसे “यौवन उपहार” कहा जाता है, और मैं उनका हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूँ। शायद इससे मुझे इस संसार की विकट समस्याओं से निपटने और अपने शिष्यों, अनुयायियों तथा श्रद्धालुओं की सहायता करने की शक्ति मिलेगी। परमेश्वर के नाम पर और इस ग्रह के सुंदर लोगों तथा समस्त प्राणियों की ओर से, मैं महामहिम बुद्धराजा साई की उदारता और करुणा के लिए उनका धन्यवाद करती हूँ। हम आपके और आपकी प्रजा के लिए भी परमेश्वर के सर्वोत्तम आशीर्वाद की कामना करते हैं। आमीन। हमारी आवश्यकता के समय हमारे पास आने के लिए मैं आपका धन्यवाद करती हूँ। आपका आशीर्वाद और उदार भावना इस संसार के सभी प्राणियों को बहुत अधिक राहत देंगे। परमेश्वर आपको अधिकाधिक आशीष दें। आपके आगमन के लिए धन्यवाद। महोदय, क्या आप स्वयं कुछ कहना चाहते हैं? जी? कृपया मुझे, हम सबको बताइए। “दशकों पहले बनाया गया शांति-सूत्र अपनी प्रभावशीलता खो चुका है। इसलिए शांति शीघ्र आती है, लेकिन टिकती नहीं। नया शांति-सूत्र शीघ्र प्रभावी होता है और स्थायी भी है।” इसके लिए परमेश्वर का धन्यवाद। महामहिम शांतिराज बुद्ध, क्या उनका कथन सत्य है? “जी हाँ, मास्टर।” धन्यवाद। महामहिम बुद्धराजा साई, क्या आपके पास कोई और जानकारी है? “हाँ, हमारे पास है। खोई हुई शांति-शक्ति की पूर्ति क्वान यिन ध्यान से हो सकती है।” वाह! वाह, इस अमूल्य जानकारी के लिए आपका धन्यवाद। शांति को अक्षुण्ण और यथासंभव स्थायी बनाए रखने के लिए हम क्वान यिन ध्यान (आंतरिक स्वर्गीय प्रकाश और नाद पर) के अपने प्रयास अवश्य कई गुना बढ़ाएँगे। धन्यवाद, बुद्धराजा साई। महामहिम बुद्धराजा साई इस ग्रह पर आठ दिन रहेंगे और कुछ समय तक ठहरने वाले अन्य बुद्धराजाओं की तरह विभिन्न स्थानों पर जाएँगे, ताकि इस संसार के निवासियों को अधिक आशीर्वाद दे सकें। हम उनका हृदय से धन्यवाद करते हैं और उनसे मिलने तथा व्यक्तिगत रूप से उनका आशीर्वाद पाने के इस सौभाग्य के लिए परमेश्वर का भी धन्यवाद करते हैं। परमेश्वर के नाम पर और पुनः एकीकृत तीन परम शक्तिशाली सत्ताओं की कृपा से, बुद्धराजा साई, आपको और आपकी प्रजा को अधिकाधिक आशीष मिले। आमीन। Photo Caption: "अपने सांसारिक घर का आनंद लें। अपने स्वर्गीय घर को याद रखें" (यहाँ जो भी दिख रहा है उसमें कोई दर्द नहीं है)











