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सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) के साथ मीडिया साक्षात्कार, 12 भागों का भाग 1

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संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रति गहरे लगाव के साथ, सुप्रीम मास्टर चिंग हाई(वीगन) ने अनेक अवसरों पर देश की यात्रा की है, और आवश्यकता के समय आध्यात्मिक ज्ञान, आशा तथा अत्यावश्यक मानवीय सहायता प्रदान की है। नवंबर 1993 में, दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया के जंगलों में लगी विनाशकारी आग के पीड़ितों को करुणापूर्ण सहायता देने के बाद, मास्टर को देशभर में कई मीडिया साक्षात्कारों के लिए आमंत्रित किया गया, जहाँ उन्होंने सदाचार और आध्यात्मिक जागृति पर अपने विचार साँझा किए। आपको इस ज्ञानवर्धक शृंखला के लिए आमंत्रित करना हमारा सौभाग्य है शीर्षक “सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) के साथ मीडिया साक्षात्कार।” पहले साक्षात्कार में, मास्टर 18 नवंबर, 1993 को लॉस एंजेलिस, कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका में कॉन्ग लुआन समाचारपत्र के सम्मानित संवाददाता, पत्रकार और प्रधान संपादक श्री डुई लिन्ह के साथ खुलकर संवाद करती हैं। इस ज्ञानवर्धक बातचीत के दौरान, मास्टर मीडिया के पवित्र दायित्व, निःस्वार्थ दान के वास्तविक स्वरूप और दयालुता तथा सदाचार पर आधारित जीवन जीने की गहन कला पर प्रकाश डालती हैं।

इस शुरुआती कड़ी में, मास्टर समझाती हैं कि दयालुता और सदाचार से जीवन जीने के लिए किसी धर्म का अनुयायी होना आवश्यक नहीं है और विभिन्न धर्म सद्भावनापूर्वक एक साथ रह सकते हैं।

(मास्टर की लगभग दो सौ तस्वीरें मैं रखता हूँ।) इतनी सारी? आपने वह कहाँ से ली? (हमने उस दिन लगभग फ़िल्म की दस रोल ली थी।) अच्छा, सच? तो आप केवल सबसे सुंदर तस्वीरें चुनकर लाए हैं, दिखाने के लिए? अच्छा, सच? कितनी सुंदर हैं! तस्वीरें बहुत अच्छी खींची गई हैं। सुंदर हैं। पीली पोशाक सुंदर नहीं है, है क्या? केवल लाल पोशाक सुंदर है; पीली वाली उतनी अच्छी नहीं है, है न? अच्छा, सच में? आह! लाल वाली अधिक सुंदर है, है न? लाल पोशाक अधिक उभरकर दिखती है, है न?

(उसे ये भेज देंगे।) उपमंत्री—ओह, मेयर, है न? (हाँ।) वे बहुत अच्छे इंसान हैं। (हाँ, वह आदमी मज़ाकिया और बहुत दयालु है।) वह अच्छा इंसान है, हाँ? वह ईमानदार हैं। अब तक, मैं उन्हें जितना जानती हूँ। वे ईमानदार और सच्चे लगते हैं — कुछ भी नहीं माँगते वह। उन्होंने बिना कुछ माँगे मुझे इतने सारे सम्मान दिए। एक पैसा भी खर्च नहीं हुआ। लेकिन संयोग से संकटग्रस्त स्थानों की सहायता करने से मेरा आध्यात्मिक जुड़ाव है—जैसे कि रोगों से जूझते क्षेत्रों। इसके अलावा, मैं नहीं देती... अजीब है। कुछ जगहों पर मैं बहुत सहायता करती हूँ, दान देती हूँ, और बहुत काम करती हूँ, फिर भी कोई कुछ नहीं कहता। वे न मुझे परेशान करते हैं, न मेरे काम में दखल देते हैं। अजीब है, है न? ओह, सच में? मैं ख़ुश दिखी? आप सब पिछली बार साथ क्यों नहीं गए?

पहले आप लोग खा लीजिए। थोड़ा (वीगन) केक लीजिए। मैं भी आपका साथ दूँगी। मैं पानी लूँगी। थोड़ा पानी पीऊं। हे भगवान, कितना बड़ा कप है! यह किसी हाथी(-व्यक्ति) के पीने के लिए है और क्या? क्या कोई छोटा कप है? इसे पकड़ना बहुत भारी है, और मैं छोटी-सी हूँ। मेरे आकार के लिए कुछ अधिक उपयुक्त... (यह वास्तव में बहुत भारी है।) यह इतना भारी है, और पूरा भरा गिलास है! हे भगवान, इतना सारा कौन पी सकता है! कोई इतना ठंडा पानी कैसे पी सकता है? अरे, कृपया मुझे कोई छोटा वाला दीजिए। चीनी-मिट्टी का या ऐसा ही कुछ— अधिक सुरुचिपूर्ण लगेता हो। थोड़ी शालीनता दिखाइए। यह तो बहुत भद्दा है!

ठीक है! आप लोग कुछ (वीगन) केक लीजिए। (हाँ।) जाओ। (हमने ले लिए हैं।) आओ, मैंने किसी को अभी खाते नहीं देखा। (मेरा पेट भर गया है।) (हमारा खाना लगभग पूरा हो गया है।) सच? (हाँ।) (मैं पहले रसोई दल के साथ मज़ाक कर रहा था, उनसे ले जाने के लिए कुछ भोजन बाँधने को कह रहा था बाँध।) क्या? क्या देने को? ("ले जाने के लिए।") "ले जाने" का क्या मतलब है? ("खाने ले जाने" का अर्थ है खाना घर ले जाना।) (मतलब, घर ले जाए इसे।) आह, हाँ! (मजाक कर रहे हैं।) ठीक है, हाँ। अभी भी बहुत कुछ बचा है। (अरे नहीं, मैं तो बस मज़ाक में कह रहा था।) कोई बात नहीं! बाद में, खाने के लिए बच्चों के लिए भी घर ले जाना, ठीक है? (नहीं, मेरे कोई [बच्चे] नहीं हैं।) (लेकिन यह अधिक स्वादिष्ट है, जो हमने हवाई में खाया उससे।) (हाँ, यह हवाई की तुलना में स्वादिष्ट और शुद्ध है।) ऐसा इसलिए क्योंकि उस दिन हमारा पेट पहले ही भर गया था, इसलिए हम अधिक नहीं खा सके। खा नहीं पाए, है न? उस दिन, मैं कुछ नहीं खा पाई थीं। (लगता है, वाहन खाना पकाना...) यह वैसा ही है। यह इस वाले से बेहतर नहीं दिखता। थोड़ा छोटा है, लेकिन और भी भारी। आप जानते हैं, मैं बहुत छोटी हूँ, ऐसी चीज़ों मुझे डराती है। मुझे अंग्रेज़ी में बोलना पड़ता है; यदि मैं चीनी में बोलूँ, तो आप बिल्कुल नहीं समझेंगे। आप सोच सकते हैं हम आपके पीछे कुछ बात कर रहे हैं। प्लास्टिक का कप फिर भी बेहतर होता। ठीक है, बस बहुत हुआ। अब और शिकायत नहीं। बार-बार शिकायत करने से भी कुछ नहीं बदलेगा।

वे कुछ ले आए जो सचमुच बहुत, बहुत ही बड़ा था। वे हमेशा मुझे यही देते हैं। मुझे भी आज शिकायत करने का मन हो रहा है। यह डरावना है। हर कप इतना बड़ा और घना है! (यहाँ हमारे पास यही सबसे छोटा है।) सबसे छोटा? (हाँ, इस तरह का कप।) मैं समझी। (वे सभी ऐसे हैं। बाकी तीनों तो सब बहुत बड़े हैं।) ओह। ओह! उन्हों ने कहा कि यहाँ यही सबसे छोटा वाला है। इस घर में, वे यही सबसे छोटा खोज पाए। इस घर में अवश्य बड़े-बड़े लोग रहते होंगे, है न? शायद यहाँ कुछ बलवान ओलासिस (वियतनामी) लोग ठहरे हैं? यह उस... उसका नाम क्या है... मैं बिल्कुल भूल गई। उसके लिए यहाँ रहना ठीक है! ऐसे बड़े लोगों के लिए, है न? इसे भार उठाना कहते हैं।

हम तो इसे भारोत्तोलन कहते हैं। मैं दोनों ओर से इसे पकड़ लूँ, तो भारोत्तोलन की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, है न? इसे पकड़ना सचमुच थका देने वाला है। (अधिक पानी के साथ यह अधिक भारी हो जायेगा।) वाह! पूरा भरा गिलास, थोड़ा नहीं! (हाँ।) वे जानते हैं कि मैं इतना खाती या पीती नहीं, फिर इतनी अधिक मात्रा क्यों भरते हैं? आप नहीं जानते कि मैं बहुत नहीं खाती हूँ। जब भी कुछ (वीगन) खाने या पीने को होता है, वे ऐसे लाते हैं मानो पूरी सैनिक टुकड़ी के लिए हो। यह तो जैसे सेना के लिए है या कुछ ऐसा। हर बार मुझे कुछ चाहिए होता है, तो आप बहुत अधिक डाल देते हैं।

(लेकिन मुझे लगता है कि आज, यहाँ बैठकर आपको थोड़ी शांति मिल सकती है। यदि आप किसी रेस्तराँ में खाने जातीं, तो आपको बिल्कुल शांति नहीं मिलती।) हाँ, यह सही है। लेकिन मुझे डर था कि आपको पसंद नहीं आएगा। मुझे डर था कि आप कहेंगे, “क्यों... आपने हमें अपने घर क्यों नहीं बुलाया? जैसे...” (ऐसा कहने की हिम्मत कौन करेगा?) अच्छा, सच? लेकिन मुझे डर है कि दूसरे लोग भी आकर यह देखेंगे और फिर दौड़े चले आएँगे। फिर वे कहेंगे, “आपने इन लोगों से मुलाकात की, मुझसे क्यों नहीं?” देखा? हमेशा ऐसा ही होता है! इसीलिए मुझे लोगों से बहुत डर लगता है। मैं केवल अत्यंत आवश्यक होने पर बाहर जाती हूँ। मैं एक बार बाहर जाती हूँ, और बस। जो भी मुझसे मिलना चाहता है, उन्हें एक ही बार में आकर मिलने दें। सब लोग मुझे देख लें, और बस। यदि लोग अलग-अलग, एक-एक करके आएँ, तो बहुत थकाने वाला होता है।

(जिस दिन से हम यहाँ लौटे हैं, हमने आपस में बात की और कहा, “धन्यवाद उस यात्रा कि अब सोच हमारी बदल गई है।”) क्या ऐसा है? (हाँ।) कौन से विचार? क्या वे अच्छे हैं? बताइए, मैं भी सुनूँ।

(फिर मास्टर ने अख़बार में लिखा वह लेख देखा।) ओह, वह लेख बहुत अच्छा था! वह लेख सचमुच बहुत अच्छा था, भूत अच्छे से लिखा था। (बस छोटा सा, बहुत छोटा सा।) हास्यपूर्ण ढंग से लिखा था, हँ? मैंने आपको पढ़ने के लिए दिया था, हँ? (हाँ।) मैं आपको दिखा चुकी हूँ, है न? फिर मैंने कहा, “वाह! भविष्य में, इस व्यक्ति को क्या बुलाना चाहिए और क्या? मैंने क्या कहा था? उसे एक पुरस्कार दें, है न?” (हाँ, कोई पुरस्कार।) उसे “हास्यपूर्ण पत्रकार” की उपाधि दीजिए। सबसे हास्यपूर्ण पत्रकार। अच्छे पत्रकारों और धारदार लेखन करने वाले पत्रकारों को पुरस्कार मिलते हैं।(हाँ।) तीखा नहीं, बल्कि सही ढंग से लिखने वाला... “सुस्पष्ट,” और औलाकी (वियतनामी) में इसका सही शब्द क्या है? यह सिर्फ़ “सही” नहीं। (सुस्पष्ट।) सुस्पष्ट। (सत्यपरक।) आह! सत्यपरक। वह सही है, वह सही है! यह चीज़ों को सच्चाई से दर्शाता है। आह, वह महिला चीनी है। वह अच्छा लिखती है। आह, वह काफ़ी आकर्षक है। (तो, मास्टर, आप उस लेख से प्रसन्न थी।) हाँ, हाँ! वह लेख अच्छा और हास्यपूर्ण भी था। लड़की बहुत ही हँसी जब उसने यह पढ़ा। इसके अलावा, ताइवान(फ़ॉर्मोसा) में एक चीनी व्यक्ति था, जिसको “सबसे साहसी पत्रकार” का पुरस्कार मिला था। पुरस्कार “सबसे सत्यपरक” का। शायद अगली बार हमें इस व्यक्ति को “सबसे हास्यपूर्ण पत्रकार का पुरस्कार” देना चाहिए, है न?

वह बहुत अच्छा लिखता है। उसका लेखन अच्छा और मज़ेदार भी है। मुझे मज़ाकिया लोग पसंद हैं। प्रेरणा होना चाहिए।(हाँ।) (मुझे लिखे हुए दस साल से भी अधिक हो गए हैं।) हर कोई कहता है कि वह लेख सचमुच बहुत अच्छा है! (मैंने दस साल से अधिक समय से कुछ नहीं लिखा; इस बार मैंने बस थोड़ा-सा लिखा। इसलिए यह बहुत संक्षिप्त है।) सच? यह संक्षिप्त नहीं है; यह बिल्कुल सही है। उसमें... क्या कहा था? उन्होंने कहा, “यह संक्षिप्त है, लेकिन यह पर्याप्त है।” उसमें सब कुछ आ गया है। समझने के लिए वहाँ जाने की जरूरत भी नहीं। (क्योंकि मैंने अपना पेशा बहुत पहले छोड़ दिया।) अच्छा, सच में? फिर ईसे व्यर्थ मत जाने दीजिए। जारी करे और तीन, चार या पाँच समाचारपत्रों के लिए लिखिए। (अब, सुप्रीम मास्टर, कृपया अख़बार की ज़िम्मेदारी संभालिए। खैर, उसे पहले रोज़ी रोटी कमानी होगा इससे पहले कि वह लिख सके!) आप अन्य प्रकाशनों के लिए भी लिख सकते हैं। वह जो लोग अच्छा नहीं लिखते, उनसे लिखवाते हैं, यह अफ़सोस की बात है। कभी-कभी वे इतना खराब लिखते हैं कि अख़बार की बर्बादी होती है, उन सारे पृष्ठों की बर्बादी। आप अन्य अख़बारों के लिए भी लिख सकते हैं— इन्हीं अख़बारों के लिए लिखना आवश्यक नहीं। (लोग इसके पैसे नहीं देते।) हम कलाकार सिर्फ पानी से काम चला सकते हैं। (लोग इसके पैसे नहीं देते।) हमें पैसे की क्या आवश्यकता है?

वाह, इस तरह अख़बार छापना बहुत महँगा पड़ता होगा, है न? इसमें बहुत खर्च आता होगा। (हाँ, यह बहुत महँगा होता है, मास्टर। हमें ही मुद्दे के लिए पैसे जुटाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, इसलिए यह काफ़ी कठिन है, क्योंकि, जैसा आप देख रही हैं, यहाँ कई अख़बार मुफ़्त बाँटे जाते हैं।) मुफ़्त अख़बार? (इन्हें बेचा नहीं जा सकता।) इन्हें क्यों नहीं बेचा जा सकता? (जब हम इन्हें बेचने का प्रयास करते हैं, तो लोग नहीं खरीदते।) (लोग इन्हें नहीं खरीदते।) (वे इस बात के आदि हैं कि अमेरिका में अख़बार कैसे काम करते हैं, जो विज्ञापन की कमाई पर निर्भर करते हैं।) सच? (और जैसा आप देख रही हैं, व्यवसाय आज कल सचमुच मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।) (यह बहुत कठिन है। वे क्या करते हैं? (वे इस पर काम करते हैं।) (वे इसे इस तरह रंगीन बनाते हैं।) (उन्हें पैसे खर्च करने पड़ते हैं।) ओह। (आपके नीचे आने से पहले, हम उस रात की चर्चा कर रहे थे जब वे आपकी तस्वीर के साथ कवर बना रहे थे, तो वहां मुझे उनके साथ पूरी रात जागना पड़ा।) ऐसा क्यों? (वरना, वे इसे बिगाड़ देते।) (डर है वे बिगाड़ देंगे।) ओह, सच में? बेचारे। यह बहुत भावुक कर देने वाला है। कोई हैरानी की बात नहीं मुखपृष्ठ इतना सुंदर है। क्या किसी ने ध्यान दिया? (यह मूल से भी अधिक सुंदर है।) हाँ, यह मूल से भी अधिक सुंदर है। मैंने ऐसा कहा था। किसी ने आपको बताया होगा, है न? (किसी ने आपको बताया था।) किसी ने आपको अवश्य बताया होगा। (किसी ने कुछ नहीं कहा।) ऐसा है? (हाँ।) अच्छा, सच? मैंने इसे ध्यान से देखा भी नहीं, फिर भी यह हमारे मूल संस्करण से अधिक सुंदर है। शिष्यों ने भी सोचा कि किसी ने ऐसा कहा होगा।

(इस बार, मास्टर जब कैलिफ़ोर्निया लौटीं, तो क्या आपको लगा कि औलाकी (वियतनामी) अख़बारों ने अलग दिशा अपना ली है? सच? क्या वे अलग हैं? (अलग हैं। वैसे अख़बारों बहुत सारे हैं।) वे बहुत सारे हैं, या आपका क्या मतलब है? (हाँ।) आपका मतलब है कि अख़बार बहुत हैं, या वे अलग ढंग से लिख रहे हैं? (वे अलग ढंग से लिख रहे हैं।) (वैसे चालीस से अधिक अख़बारों हैं।) तो अब वे अलग ढंग से लिख रहे हैं? (नहीं। लेकिन वे लिखते हैं...) क्या सब मेरे बारे में है? (सुप्रीम मास्टर चिंग हाई के बारे में।) अलग? (लगभग छह अख़बारों।) ओह, सही। ओह, सच में? अच्छा, मुझे देखने दीजिए। (यह “वुई” मैगज़ीन।) ओह, “वुई।” (“तिन्ह थुओंग” पत्रिका।) “तिन्ह थुओंग।” (“वियतनाम प्रेस” अख़बार।) “वियतनाम प्रेस।” (और “वियतनाम पोस्ट” अख़बार।) “वियतनाम पोस्ट।” (चार अख़बार।) पाँच अख़बार— आह, चार अख़बार।

(...मुद्दे को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना।) अर्थात्, मुद्दे को स्पष्ट करना, है न? (किसके पक्ष में? सच में? मैंने इसे नहीं देखा था। (वह पुराना मुद्दा था।) अच्छा, समझी। (लगभग चार या पाँच महीने पहले। बात यह है...) ओह, यह तो बढिया है। (मुद्दा विचार व्यक्त करने का है। जैसे: यदि कोई मास्टर का समर्थन करता है, तो उसे आपका समर्थन कैसे करना चाहिए? यदि कोई मास्टर का विरोध करता है, तो वह किस बात का विरोध कर रहा है?) हाँ, उन्हें बताना चाहिए कि वे किस बात का विरोध करते हैं।(स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।)

यदि आप किसी का विरोध करते हैं, तो उचित ढंग से बोलना चाहिए। वे बस मेरी गलती बताए बिना लगातार आलोचना करते रहते हैं। मैंने क्या अपराध किया है? (लेकिन ...के अनुसार... मास्टर, आपके विचार से इतने लोग आपका विरोध क्यों करते हैं?) कौन जाने? (हाँ।) हमें यह भी नहीं पता कि वे किस बात का विरोध कर रहे हैं। यदि पता होता हमे, तो कम-से-कम हम स्पष्ट कर सकते थे।

(क्योंकि बौद्ध धर्म का पालन करने वाले कुछ लोग सोचते हैं कि सुप्रीम मास्टर किस बौद्ध संप्रदाय के हैं? या फिर...) मुझे बौद्ध धर्म का होना क्यों आवश्यक है? (नहीं। मेरा मतलब है, क्या यह कुछ अलग है?) हाँ। (हाँ।) हाँ। लेकिन उदाहरण के लिए, यदि हम बौद्ध है और दूसरे धर्मों की निंदा करें, तो हम विभाजन और घृणा पैदा करते हैं। यह बहुत भयानक होगा।

(तो इसका अर्थ है कि आपकी शिक्षा में...) हाँ। यदि हम बौद्ध धर्म का पालन करते हैं और विभाजन पैदा करते हैं, तो वह बौद्ध धर्म ही नहीं रहा, किसी और बात की तो छोड़िए। उदाहरण के लिए, यदि कोई धर्म लोगों की हत्या और लूटपाट का समर्थन करे, या हर तरह के गलत काम करने को कहे, समझे आप? उदाहरण के लिए, ईसाई धर्म को लीजिए। आमतौर पर, मैं बताती हूँ कि इन दोनों धर्मों के सिद्धांत समान हैं, क्योंकि वैसे धर्म बहुत हैं और हम सबकी चर्चा नहीं कर सकते। ईसाई और बौद्ध धर्म को ही देखिए। क्या ईसाई धर्म में दस आज्ञाएँ नहीं हैं? दस निषेध? हत्या न करो, चोरी न करो, फूट डालने वाली बातें न कहो, व्यभिचार न करो, झूठ न बोलो। समझे आप? “अपने पड़ोसी से प्रेम करो,” समझे आप? या अपने साथी मनुष्यों से प्रेम करो, है न? कोई धर्म कुछ गलत नहीं सिखाता, तो मैं उनमें से किसी की निंदा क्यों करूँ?

(सुप्रीम मास्टर, ऐसा इसलिए है क्योंकि लोग चाहते हैं कि आप अपनी शिक्षाओं को बौद्ध धर्म का एक रूप कहें।) मुझे नहीं पता, मैं ऐसा नहीं करूँगी... इसे कोई नाम देना ही नहीं चाहिए। (ओह, तो यह कोई अलग संप्रदाय है?) वैसे कोई संप्रदाय है ही नहीं। लोगों को दयालु और सदाचारी जीवन जीना सिखाने के लिए किसी संप्रदाय की आवश्यकता नहीं।(हाँ।)

हर चीज़ को नाम और ठप्पा देना क्यों आवश्यक है? वैसे ही हम आध्यात्मिक साधना कर रहे हैं, जिसका अर्थ है निराकार अवस्था में प्रवेश करना, है न? (हाँ।) यह कहा भी गया है कि “चारों तत्व शून्य हैं,” तो हर चीज़ को इतना जटिल क्यों बनाना? फिर वे अलग-अलग नाम देते रहते हैं, यह धर्म, वह धर्म, जिससे लड़ाइयाँ होती हैं और लोग एक-दूसरे को नष्ट करते हैं। यह आध्यात्मिक साधना बिल्कुल नहीं है। यह राजनीति नहीं है। मुझे इस तरह काम करना पसंद नहीं। (हाँ।) ऐसा क्यों है कि मेरे जो अनुयायीओं हैं, चाहे उनकी धार्मिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो, एक-दूसरे के साथ इतनी सद्भावना से रहते हैं? वे सत्य को पूरी तरह समझते हैं कि सब एक ही है, तो इससे क्या फ़र्क पड़ता है कि यह धर्म कौनसा है, यह धर्म या वह धर्म? मैं यह कई बार समझा चुकी हूँ; पत्रिकाओं और पुस्तकों में भी इसका उल्लेख हुआ है। बुद्ध के परिनिर्वाण के बाद हमने इसे बौद्ध धर्म कहा। प्रभु यीशु के देहांत के बाद हमने इसे ईसाई धर्म कहा। पैग़ंबर मुहम्मद (उन पर शांति हो) के देहांत के बाद, हमने इसे इस्लाम कहा, समझे आप?

उससे पहले, क्या आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए वे गुरुओं किसी धर्म के थें? आत्मज्ञान प्राप्त करने से पहले क्या शाक्यमुनि बुद्ध बौद्ध धर्म का पालन करते थे? (सही।) आप ही बताइए, महोदय। तब बौद्ध धर्म था ही नहीं, है न? तो उसको प्राप्त करने के लिए उन्होंने किसका पालन किया? प्रभु यीशु के जन्म से पहले क्या ईसाई धर्म था? तो मसीह बनने के लिए उन्होंने किसका पालन किया? मुझे इस तरह हर बात का स्पष्टीकरण देना पसंद नहीं। जो अनुसरण करना चाहता है, वह करे। यदि वे आएँगे, तो सीख पाएंगे और समझ सकेंगे। और यदि नहीं चाहते, तो भी ठीक है। कोई किसी को मजबूर नहीं कर रहा।

(हम इसे स्पष्ट करने के लिए पूछना चाहते हैं...) हाँ। मैं जानती हूँ आप केवल पूछ रहे थे। मैं उन लोगों की बात कर रही हूँ, आपसे बहस नहीं कर रही।

Photo Caption: "लंबी उम्र के लिए आभारी"

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