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इस एपिसोड में, मास्टर समझाती हैं कि सार्थक योगदान हमारे राष्ट्र और विश्व दोनों का सम्मान करता है, और ज़ोर देती हैं कि आत्म-साक्षात्कार के लिए औपचारिक शिक्षा आवश्यक नहीं है।जहाँ तक यह प्रश्न है कि मैं किसकी सहायता करती हूँ—वह मेरा धन है। मैं जिसकी चाहूँ, सहायता करूँ। यह मेरा निर्णय है। (जी हाँ, मास्टर... आम तौर से...) नहीं, मेरा यहाँ मतलब नहीं है। हाँ, कृपया एक पल इंतज़ार करें। (जी हाँ।) कभी-कभी जब हम किसी की मदद करते हैं, तो वह उसे तभी ग्रहण कर सकता है, जब उसके पास पुण्य हो। और आत्मीय संबंध भी होना चाहिए, है न? (हाँ, आत्मीय संबंध होना चाहिए।) (हाँ।) हम इस बारे में पहले ही बात कर चुके हैं। (हाँ।) ऐसा तो नहीं कि हम जिसकी चाहें, उसकी मदद कर सकें, है न?मैं केवल मदद करती हूँ; मैं कुछ लेती नहीं। मुझे पैसों की क्या आवश्यकता होगी? मैं तो बस एक तंबू में रहती हूँ। मेरे पास कार नहीं है, और अब घर भी नहीं है। जब मैं यहाँ आती हूँ, तो कुछ दिन किसी और के घर ठहर जाती हूँ। किस चीज के लिए मैं पैसे लूँगी? अब भला मुझे पैसों की क्या आवश्यकता होगी? यदि मेरी कोई नौकरी या व्यवसाय होता, तो शायद व्यवसाय आदि के लिए पैसे चाहिए होते। मैं दिन में एक या दो बार भोजन करती हूँ। जहाँ भी जाती हूँ, शिष्यों की कार में चली जाती हूँ और उन्हीं के घर ठहरती हूँ। और लौटकर तंबू में रहती हूँ। तो मुझे पैसों की क्या आवश्यकता है? उदाहरण के लिए, आपको पैसे किसलिए चाहिए? व्यवसाय या किसी और काम के लिए, है न?और यदि मुझे पैसों की आवश्यकता होती भी, तो अंततः मैं उन्हें यहाँ, वहाँ या कहीं और दे देती। वैसे भी वह वास्तव में मेरा पैसा नहीं है, तो उसकी इतनी चिंता क्यों करूँ? मैं किसी की भी मदद करूँ, औलाक (वियतनाम) की भी मदद कर रही हूँ। हम इतनी संकीर्ण सोच क्यों रखते हैं? यदि हम सब कुछ इसी तरह अपने तक सीमित रखेंगे, तो कोई हमारे बारे में नहीं जान पाएगा। हमें व्यापक जनसमुदाय के साथ जुड़ना होगा।मैं औलाक (वियतनाम) से हूँ। इसलिए मैं किसी की भी मदद करूँ, लोगों को पता चलेगा कि एक औलाकी (वियतनामी) ने उनकी मदद की। लोग सम्मान या सार्वभौमिक प्रेम के बारे में सोचे बिना केवल पैसों की चिंता करते रहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि मैं सबकी मदद करूँ, तो लोग कहेंगे, “औलाकी (वियतनामी) लोग सबसे प्रेम करते हैं। वे केवल औलाकी (वियतनामी) लोगों की नहीं, बल्कि सबकी मदद करते हैं।” देखा? क्या इससे औलाक (वियतनाम) का सम्मान नहीं बढ़ेगा? आपका क्या विचार है? (अच्छा।)ऐसा सम्मान पैसे से नहीं खरीदा जा सकता। पैसा खर्च हो जाए, तो यह चला जाता है। लेकिन संसार और अपने देश का सम्मान बढ़ाने के लिए हम जो करते हैं, वह बना रहता है। वही एक सच्चा योगदान है। आप शिक्षित हैं। ज़रा सोचिए सके बारे, आपको तुरंत समझ आ जाएगा, है न?उदाहरण के लिए, यदि कोई औलाकी (वियतनामी) व्यक्ति ऐसा अच्छा काम करे, जिससे दुनिया भर में औलाक (वियतनाम) को समर्थन मिले, तो क्या यह हमारे देश के लिए अच्छा नहीं होगा? इसके बजाय, हम केवल अपना पेट भरने की सोचते हैं। तब सब कुछ चला जाता है। उन लोगों से कहिए कि उन्हें बहुत बड़ी गलतफहमी हुई है। किसी औलाकी (वियतनामी) व्यक्ति ने मुझे पैसे नहीं दिए हैं। यह सब मेरा पैसा है, या ताइवान (फॉर्मोसा) से भेजी गई धनराशि है। यह पहली बात है। दूसरी बात, मैं किसी की भी मदद करूँ, औलाकी (वियतनामी) लोगों की भी मदद कर रही हूँ। हम इसी संसार में रहते हैं। सामान्य रूप से और विशेषकर औलाक (वियतनाम) के संदर्भ में, यदि औलाकी (वियतनामी) लोगों की प्रतिष्ठा अच्छी होगी, तो संसार औलाक (वियतनाम) को जानने लगेगा, है न?इसलिए उनसे कहिए कि वे व्यापक सोचें और दूर की सोचें। व्यापक दृष्टि रखें और दूर तक देखें। यदि हमारी सोच अदूरदर्शी होगी, तो काम कराना कठिन होगा। इसी अदूरदर्शिता के कारण बहुत-से लोगों ने औलाकी (वियतनामी) समुदाय को हानि पहुँचाई है। एक समाचार-पत्र दूसरे समाचार-पत्र पर आक्षेप करता है। या एक समूह दूसरे समूह पर हमला करता है। हर कोई मुखिया बनना और नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहता है। कोई भी देश और उसके लोगों के साझा सम्मान के बारे में नहीं सोचता। उदाहरण के लिए, यदि मैं भी वैसा ही व्यवहार करूँ, तो आप क्या सोचेंगे? क्या मैं तब भी गुरु होने योग्य रहूँगी? आज मैं थोड़ी “उत्साहित” हूँ। क्योंकि आते ही न्होंने उहमला कर दिया, तुरंत वार कर दिया। तुरंत शह-मात, तुरंत शह-मात। (ओह, नहीं। मैं केवल एक पत्रकार के नाते पूछ रहा हूँ, जनता के लिए चीजों को स्पष्ट करने में मदद के लिए।) ठीक है, ठीक है। मैं जानती हूँ। (हाँ।) मैं जानती हूँ। लेकिन इस अप्रकार के विषय लोगों को थोड़ा असहज कर देते हैं। (हाँ।) क्योंकि वे बार-बार पूछते रहते हैं। हर कोई यही प्रश्न पूछते हैं। (हाँ।) क्योंकि इन्हीं विषयों को लेकर वे सबसे अधिक चिंतित हैं। (हाँ।) क्योंकि इस संसार में सामान्य लोगों की समझ का स्तर लगभग एक जैसा होता है। इसलिए मैं जहाँ भी जाती हूँ, सब वही प्रश्न पूछते हैं। उन्हें सुनते ही मुझे पसीना आने लगता है। (पत्रकार होने के नाते, हम बस उस तर्क पर सवाल उठा रहे हैं ताकि चीजें स्पष्ट हो सकें।) हाँ, मैं जानती हूँ। ठीक है, मैं जानती हूँ, जानती हूँ। हाँ। लेकिन आप पहले व्यक्ति नहीं हैं।(जी हाँ। गुरुजी, क्या मैं पूछ सकता हूँ, बहुत-से लोग कहते हैं कि आपका अनुसरण करने वाले बहुत पढ़े लिखे है और उनके पास उच्च डिग्रियां हैं।) कुछ उच्च शिक्षित हैं, और कुछ कम शिक्षित। (समझा।तो आपके अनुयायी जीवन के हर क्षेत्र से आते हैं।) हर तरह के लोग हैं। (समझा।) हाँ, हाँ।(तो गुरुजी, क्या आप बता सकती हैं कि कम शिक्षित लोग आपका अनुसरण क्यों करते हैं और उच्च शिक्षित लोग भी क्यों करते हैं?) वही कारण है: अपने सच्चे स्वरूप को खोजना। वहाँ सच्चा स्वरूप न कम शिक्षित है न उच्च शिक्षित। (हाँ।) वे जन्म-जन्मांतर से विवेकवान रहे हैं। (हाँ।)मैं उनके भीतर के उस सहज स्वभाव को पुनः खोजने में सहायता करती हूँ और वे उसे पाते हैं। वे उसे धीरे-धीरे खोजते हैं, हर दिन थोड़ा। इसलिए वे प्रसन्न होते हैं, उन्हें अच्छा लगता है और वे अनुसरण करते हैं। यह कुछ ऐसा है जिसे समझने के लिए औपचारिक शिक्षा की आवश्यकता नहीं है। जैसे छठे धर्मगुरु हुइनेंग ने औपचारिक शिक्षा नहीं पाई थी, (हाँ।) फिर भी वे विवेकवान और प्रबुद्ध थे। जबकि शेनश्यू ने व्यापक अध्ययन किया था, बहुत ज्ञान अर्जित किया था, और 30 वर्षों तक अपने गुरु का अनुसरण भी किया था, फिर भी वे हुइनेंग के स्तर तक नहीं पहुँचे। यह तो केवल एक उदाहरण है।यह लेख आपने लिखा है, और दूसरा श्री ल्यू के द्वारा लिखा गया था, है न? ठीक है। तो हास्यपूर्ण लेख श्री ल्यू ने लिखा है। और यह वाला आपने लिखा है। (मेरा भी मज़ेदार है।) आह, हाँ, वास्तव में बहुत मज़ेदार, बहुत मज़ेदार। (यह भी काफ़ी मनोरंजक है।) बहुत रचनात्मक है। (क्या इसमें कोई ऐसी बात है जिससे गुरुजी असहमत हैं?) नहीं, नहीं। मैं पूरी तरह सहमत हूँ। मैं हर बात से सहमत हूँ। क्या सबको पहले का भोजन अच्छा लगा? क्या वह आपके स्वाद के अनुसार था? (हाँ, बहुत स्वादिष्ट था, गुरुजी।) (बहुत स्वादिष्ट था, गुरुजी।) सच? क्या वह बहुत स्वादिष्ट था? (हाँ, सच में बहुत स्वादिष्ट था।) अच्छा, यह तो अच्छी बात है।(गुरुजी, क्या इस यात्रा में क्या आपकी अपने शिष्यों और बड़े समूहों से मिलने और बातचीत करने की की योजना है?) हाँ, हाँ। पिछले रविवार को मैं हवाई अड्डे से लगभग साढ़े दस, करीब 11 बजे पहुँची थी। मैं रविवार को लौटी और तुरंत शिष्यों से बात की। वे ध्यान केंद्र में प्रतीक्षा कर रहे थे। (जी हाँ।) मैं हवाई अड्डे से सीधे उनसे मिलने चली गई। उन्हें हर दिन देखना उन्हें परेशान करेगा। बेहतर है उन्हें अपना काम करने दें। वैसे भी रविवार को, वे एकत्र होते हैं, इसलिए मैंने इस अवसर पर वहां जाकर उनसे भेंट कर ली। (हाँ।)यदि मैं कभी-कभार आऊँ और बुधवार या गुरुवार को यहाँ रहूँ, तभी उन्हें हमारी भेंट के लिए सभा आयोजित करनी पड़ेगी। अन्यथा, यदि मैं अधिक समय तक रहती हूँ, तो उन्हें सामान्य रूप से अपना काम करने देती हूँ। (क्या आप इस बार वापस हवाई जा रही हैं, या सीधे ताइवान (फॉर्मोसा) जा रही हैं?) इतने सारे स्थानों से निमंत्रण मिले हैं कि, शायद मैं अभी ताइवान (फॉर्मोसा) नहीं लौट पाऊँगी। ताइवान (फॉर्मोसा) ने भी मुझे आमंत्रित किया है। अब ताइवान (फॉर्मोसा) ने देखा है कि अमेरिका ने मुझे पुरस्कार दिया है, तो उन्होंने भी मेरे व्यवसाय से संबंधित एक और पुरस्कार लेने के लिए मुझे वापस बुलाया है। उसे क्या कहते हैं… कुछ आध्यात्मिक, आध्यात्मिक कार्य के लिए पुरस्कार। और यह सांसारिक अवार्ड था, लेकिन उन्होंने कहा कि वे मुझे मेरे आध्यात्मिक कार्य के लिए पुरस्कार देना चाहते हैं। मैंने कहा, “ओह, पुरस्कार की आवश्यकता नहीं है? वह सब परेशानी क्यों उठाये?मैं अमेरिका क्यों आई? मैंने बताया कि हाल में यहाँ बहुत-सी आपदाएँ आई हैं। मैं पुरस्कार लेने और उनसे अधिक आत्मीय संबंध स्थापित करने यहाँ आई हूँ। (हाँ।) वरना, पहले, जब भी मैं अमेरिका आती थी, तुरंत लौट जाना चाहती थी। जब भी यहाँ आई, मैं अधिक समय तक नहीं ठहर पाती थी। (कुछ दिन पहले, यहाँ एक भूकंप आया था।) अच्छा, ऐसा है? (हाँ।) मुझे लगता है कि यहाँ कोई ऐसी शक्ति है जो बहुत अच्छी नहीं है। यह भूमि बहुत-बहुत अच्छी है, लेकिन कभी-कभी बहुत से बुरे कर्म उत्पन्न किए गए हैं। (जी हाँ।) इसलिए मैंने सोचा कि मैं यह पुरस्कार उनके हित में स्वीकार करूँगी, अपने लिए नहीं। उनके लिए शुभ संबंध का बीज बोने हेतु। यदि वे मेरा सम्मान करेंगे, तो उनके देश को भी सम्मान मिलेगा।आप वह कहावत जानते हैं: जैसा बोओगे, वैसा काटोगे, है न? बौद्ध धर्म में हम यही कहते हैं। हाँ, [प्रभु] ईसा मसीह ने भी यही कहा था: “जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे।” यदि वे इस तरह मेरा सम्मान करेंगे, तो भविष्य में उन्हें भी अवश्य सम्मान मिलेगा। क्योंकि वे अपने लिए एक उज्ज्वल और सकारात्मक कारण का बीज बो रहे हैं। मैं अमेरिकी लोगों के हित में यह पुरस्कार लेने यहाँ आई हूँ। जहाँ तक ताइवान (फॉर्मोसा) की बात है, मैं वहाँ पहले ही लंबे समय तक रह चुकी हूँ — छह, सात, आठ वर्ष। हर बात को आत्मसात करने का पर्याप्त समय मिल चुका है और बहुत-से लोग मुझे जान चुके हैं। अब उनमें से बहुत-से लोग निष्ठापूर्वक आध्यात्मिक साधना कर रहे हैं। केवल पुरस्कार लेने के लिए वहाँ लौटने की आवश्यकता नहीं है। वह अनावश्यक होगा। आप समझते हैं, है न? (हाँ।) इसीलिए मैं पुरस्कार लेने ताइवान (फॉर्मोसा) वापस नहीं गई। उसकी कोई जल्दी नहीं है। मैं केवल पुरस्कार लेने के लिए वहाँ की विशेष यात्रा नहीं करूँगी। उदाहरण के लिए, बाद में, जब अमेरिका में मेरा सारा काम पूरा हो जाए, मैं शिष्यों और उन सभी स्थानों की यात्रा कर लूँ जहाँ से मुझे सच्चे मन से बुलाया गया है, और लौटते समय संयोग से ताइवान (फॉर्मोसा) से गुज़रना हुआ, उदाहरण के तौर पर, फिर, जबकि मैं वहाँ ठहरी हूँ, यदि वे अब भी मुझे पुरस्कार देना चाहते हैं, तो ठीक है। (हाँ।) लेकिन केवल पुरस्कार लेने के लिए मैं विशेष रूप से अमेरिका से निकलकर इतनी दूर औलाक (वियतनाम) नहीं जाऊँगी और फिर जल्दबाज़ी में वापस नहीं लौटूँ। मोटे तौर पर बात यही है। इसीलिए मैं अभी तक औलाक (वियतनाम) नहीं लौटी हूँ, समझे।फिलहाल, शायद मैं कुछ और समय तक अमेरिका में घूमना जारी रखुँगी। इस बार, यहाँ ठहरकर मुझे सहज महसूस हो रहा है। बस ऐसा ही लग रहा है। ऐसा होता है जब समय आने से पहले बस हम कुछ कर ही नहीं सकते। पहले, जब भी मैं यहाँ आती थी, कुछ ही दिनों में मैं लौट जाना चाहती थी। कभी-कभी बहुत धैर्य रखकर मैं दो या तीन सप्ताह ठहर जाती थी। अब लगता है कि मैं थोड़ा अधिक समय ठहर सकती हूँ। (शायद यह उसी आत्मीय संबंध के कारण है।) आत्मीय संबंध के कारण ही वे मेरा सम्मान करते हैं। (सम्मान।) वे निष्ठावान आध्यात्मिक साधकों का सम्मान करते हैं। (हाँ।) और उससे वे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। (हाँ।) उन्हें क्यों नहीं प्राप्त करते, है न? (हाँ।) प्रमुख लोगों अधिक पुण्य प्राप्त करते हैं। और इसका समर्थन करने वाले लोग—पूरा राष्ट्र, पूरा देश, वे सभी आशीर्वाद पाएँगे।(जी हाँ।)(मास्टर, यहाँ अमेरिका में बहुत-से अमेरिकन लोग हैं जो आपका अनुसरण करते हैं।) हाँ, हाँ। (क्या उनकी संख्या बहुत अधिक थी?) हाँ, काफ़ी अधिक। (जी हाँ।) लेकिन आजकल, उनमें से अधिक लोग ध्यान नहीं करते, क्योंकि यहाँ उनकी संख्या औलाक (वियतनाम) से कम है। आमतौर पर, वे घर पर अधिक ध्यान करते हैं। वे बाहर निकलने में बहुत आलसी हैं। यह मेरी वजह से है। इसमें मेरी भी गलती है। क्यों? क्योंकि पहले, जब मैं यहाँ आती थी, तो केवल औलाकी (वियतनामी) भाषा में बोलती थी। (हाँ।) वे वहाँ बैठकर अनुवाद सुनते थें और यह उनके लिए बहुत थकाऊ होता था। (हाँ।) कई लोग तो अनुवाद करने का कष्ट भी नहीं उठाते थे। वे इतने प्रसन्न होकर और आनंद से सुनते हुए, बैठे रहते थे कि वे बिल्कुल भूल गए कि उन्हें अनुवाद करना था। यह एक कारण है। दूसरा, मैं यहाँ अधिक समय तक नहीं ठहरती थी। (हाँ।) आमतौर पर, जब लोग मुझसे मिलने आते थे, तो औलाकी (वियतनामी) लोग मुझे पूरी तरह घेर लेते थे। और अमेरिकी लोग बाहर खड़े रहते थे। वे धक्का देकर भीतर नहीं आते थे; उन्हें ऐसा करने की आदत नहीं थी। लेकिन औलाकी (वियतनामी) शिष्यों बिल्कुल संकोच नहीं करते थे। जैसे ही वे मुझे देखते थें, वे दौड़कर आते और मुझे घेर लेते थे। इसलिए पीछे खड़े अमेरिकी लोग अंततः निराश हो जाते थे। तो यदि मैं थोड़ा अधिक समय ठहरूँगी, तो वे अधिक लगनशील होंगे और उनकी आध्यात्मिक साधना बेहतर होगी। (हाँ।)इस बार, यहाँ की यात्रा के दौरान अमेरिकियों ने मेरी बहुत सहायता की है। उदाहरण के लिए, यह पैसे की बात नहीं है। बल्कि, वे लोगों को बताते हैं या अपने मित्रों को आने के लिए आमंत्रित करते हैं, इत्यादि। कभी-कभी वे प्रेस से भी संपर्क करते हैं। (हाँ।) वे यह सब स्वयं करते हैं; मुझे इसके बारे में पता भी नहीं होता। कभी-कभी वे कार्यक्रमो आयोजित करते हैं फिर मुझे बताते हैं कि यहाँ यह या वह हो रहा है। फिर मैं चली जाती हूँ। ऐसा ही होता है। (हाँ।)यदि कोई काम सार्थक हो, तो मैं जाती हूँ। उदाहरण के लिए, पूर्व सैनिकों से मिलना और ऐसे ही अन्य कार्य। उन्होंने हमारे लोगों के लिए युद्ध किया और हमारी रक्षा की। उन्होंने जो किया वह सही था या गलत, इससे परे, वे युवा लोग जब युद्ध करने गए, वे उच्च आदर्शों से प्रेरित हुए थे इसलिए ऐसा किया। वरना कौन जाना चाहेगा, है न? इसलिए मैं उन्हें धन्यवाद देने गई। (मास्टर, आपने उसके लिए यूएस$2,00,000 दान किए।) हाँ, मैंने यूएस$2,00,000 भी दान किए। (पूर्व सैनिकों को?) देश भर के पूर्व सैनिकों को। हाँ। क्या इसकी खबर छपी थी? (उसकी खबर नहीं छपी थी।) मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं था। (मालिबू वाली खबर छपी थी, लेकिन पूर्व सैनिकों वाली नहीं।) अच्छा, सच? (हाँ, मालिबू वाली खबर छपी थी, लेकिन पूर्व सैनिकों वाली नहीं।) कोई समाचार-पत्र या और कुछ खरीदता या पढ़ता क्यों नहीं है?(तो पूर्व सैनिकों को यह दान इसी बार दिया गया था, या...?) हाँ, अभी हाल में। (हाँ, अभी हाल में?) हाँ। क्योंकि जब मैं हवाई में थी, मैंने पहले ही वचन दे दिया था कि अगर मेरी इस बार संयोग से उनसे भेंट हुई, मैं उन्हें बताऊँगी।(और मुझे याद है कि हवाई में गुरुजी ने पूर्व सैनिकों के लिए यूएस$2,00,000 देने का वचन दिया था।) मैंने यूएस$2,00,000 देने का वचन नहीं दिया था, लेकिन मैंने अवश्य वचन दिया था मैं कुछ दुँगी। (हाँ।) संयोग से उनसे भेंट हो गई, इसलिए मैंने तुरंत उन्हें दे दिया। (तो अब आप यूएस$2,00,000 दान दे रही है?) हाँ। हाँ, वह काम हो चुका है। (गुरुजी वहाँ केवल पाँच-छह मिनट रुकीं, संक्षेप में बोलीं और फिर तुरंत चली गईं।) बिल्कुल, बिल्कुल। क्योंकि मुझे विमान पकड़ना था। (आपको तुरंत जाना पड़ा।) हाँ, मुझे विमान पकड़ना था। आपको पता है किस तारीख को अख़बार प्रकाशित हुआ था?) (यह लगभग एक सप्ताह पहले था।) किसी ने उसे खरीदा ही नहीं, देखा आपने? मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं था। (शायद उन्होंने खरीदा हो, पर ध्यान न दिया हो।) क्या ऐसा है? (कभी-कभी ऐसी खबरें… कई कॉलम ले लेता है।) क्या आपके पास वह समाचार-पत्र है? (मेट्रो के पास।) (कभी-कभी बाहर आने के बाद, लोगों उस पर ध्यान नहीं देते।) तुरंत ही फेंक देते हैं। बिल्कुल। (मेट्रो में।) सच? (“मेट्रो” विभाग में।) किसी से हाल के समाचार-पत्रों में ढूँढ़ने को कहिए और देखिए। (हाँ।) आप सब कहते हैं कि यह हर जगह छपा था, लेकिन मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं था। मुझे भी देखने दीजिए, ताकि इस बार थोड़ा गर्व कर सकूँ, कुछ अच्छा लगे। अहं को थोड़ा उभरने दें। हर समय आलोचना सहना भी थकाऊ होता है। उसे थोड़े विटामिन दीजिए, ताकि वह फिर काम पर लग सके। (लेकिन अहं उन चीज़ों में से है जिन्हें परम गुरु ने निषिद्ध किया है।) कोई बात नहीं। हम उसका उपयोग करें; उसे अपना उपयोग न करने दें। बस इतनी-सी बात है। (हाँ, बिल्कुल।) (यही महत्त्वपूर्ण है।)कोई भी अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं होती। यह निर्भर करता है कि हम उसका उपयोग कैसे करते हैं। (हाँ।) विष का उपयोग भी रोग के उपचार में किया जा सकता है, समझे आप? (हाँ।) (तो, इसका अर्थ है कि गुरुजी ने मालिबू के अग्नि पीड़ितों को यूएस$2,00,000 और पूर्व सैनिकों को भी दान दिया?) नहीं।(नहीं। दान सामान्य अग्नि-राहत प्रयासों के लिए था?) सामान्य अग्नि-राहत के लिए। (दक्षिणी कैलिफोर्निया को हाल में दिया गया दान यूएस$2,00,000 था। और यूएस$2,00,000 पूरे अमेरिका के पूर्व सैनिक संघ को दिए गए, यानी कुल यूएस$4,00,000।) हाँ, यह सहि है। कुल मिलाकर, यह यूएस$4,00,000 हैं। (कुल चार यूएस$4,00,000।) मैंने उनसे ताइवान (फॉर्मोसा) से संपर्क करने और बैंक खाता का विवरण देने को कहा, ताकि हम धन वहाँ भेज सकें।(हाँ।) मैं अपने साथ नोटों की गड्डियाँ या नकद लेकर नहीं घूमती। उन्हें लिखित प्रतिज्ञा दे देना ही पर्याप्त है। वे संपर्क करके हमें बताएँगे कि किस माध्यम का उपयोग करना है।Photo Caption: "नाजुक, सुंदर जंगली घास-फूल एक स्नेही विशाल मित्र द्वारा सुरक्षित"











